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ईडी (ED) क्या है? कैसे काम करती है और क्या सुधार की जरूरत है ?

ईडी (ED) क्या है? कैसे काम करती है और क्या सुधार की जरूरत है ?

ईडी (ED) क्या है?

ईडी एक बहु-विषयक संगठन है जो मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघनों की जांच का अधिकारपूर्वक निपटता है। यह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत कार्य करता है। भारत सरकार का एक मुख्य वित्तीय जांच एजेंसी के रूप में, ईडी भारतीय संविधान और कानूनों का पालन करता है।

ईडी (ED) की उत्पत्ति कैसे हुई?

ईडी की शुरुआत 1 मई, 1956 से हुई, जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA), 1947 के तहत विनिमय नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन से निपटने के लिए आर्थिक मामलों के विभाग में एक 'प्रवर्तन इकाई' का गठन किया गया था। यह मुख्यालय दिल्ली में था, जिसका नेतृत्व एक कानूनी सेवा अधिकारी, प्रवर्तन निदेशक करता था।

ईडी की संरचना (Structure) क्या है?

इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, जिसका नेतृत्व प्रवर्तन निदेशक करता है। मुंबई, चेन्नई, चंडीगढ़, कोलकाता और दिल्ली में पांच क्षेत्रीय कार्यालय हैं जिनकी अध्यक्षता विशेष प्रवर्तन निदेशक करते हैं।

ईडी के कानूनी कार्य क्या हैं?

1. कोफेपोसा (COFEPOSA) THE CONSERVATION OF FOREIGN EXCHANGE AND PREVENTION OF SMUGGLING. ACTIVITIES ACT, 1974: विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974 (COFEPOSA) के तहत, ईडी को FEMA के उल्लंघन के संबंध में निवारक हिरासत के मामलों को प्रायोजित करने का अधिकार है।

2. विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA): ईडी को विदेशी मुद्रा कानूनों और विनियमों के संदिग्ध उल्लंघनों की जांच करने, कानून का उल्लंघन करने वालों पर निर्णय लेने और जुर्माना लगाने की जिम्मेदारी दी गई है।

3. पीएमएलए (Prevention of Money Laundaring Act): ईडी को अपराध की आय से प्राप्त संपत्ति का पता लगाने, संपत्ति को अस्थायी रूप से संलग्न करने और विशेष अदालत द्वारा अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चलाने और संपत्ति की जब्ती सुनिश्चित करने के लिए जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

4. भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018: हाल ही में, विदेशों में शरण लेने वाले आर्थिक अपराधियों से संबंधित मामलों की संख्या में वृद्धि के साथ, भारत सरकार ने फगिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट, 2018 (फीओए) को पेश किया और ईडी को इसकी जिम्मेदारी और प्रवर्तन का काम सौंपा गया है। यह कानून आर्थिक अपराधियों को भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर भारतीय कानून की प्रक्रिया से बचने से रोकने के लिए बनाया गया था। इस कानून के तहत, ईडी को उन फगिटिव आर्थिक अपराधियों की संपत्तियों को कुर्क करने और केंद्र सरकार को उनकी संपत्तियों को जब्त करने का प्रावधान करने का आदेश दिया गया है, जो भारत से भाग गए हैं।

PMLA के तहत ED कैसे काम करता है और ईडी की शक्तियां क्या हैं:

ईडी, जो PMLA की धारा 16 के अंतर्गत संपत्ति की तलाशी और धन और दस्तावेजों की जब्ती कर सकती है, और धारा 17 के अंतर्गत निर्णय करने के बाद पैसे और दस्तावेजों की जब्ती करती है। उसके आधार पर, अधिकारी तय करते हैं कि क्या धारा 19 (गिरफ्तारी की शक्ति) के अंतर्गत गिरफ्तारी की आवश्यकता है या नहीं। PMLA की धारा 50 के तहत, ईडी किसी व्यक्ति को पूछताछ के बिना सीधे तलाशी और जब्ती कर सकती है। यह आवश्यक नहीं है कि पहले व्यक्ति को बुलाया जाए और फिर तलाशी और जब्ती शुरू की जाए। अगर व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, तो ईडी को 60 दिनों का समय मिलता है अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दायर करने के लिए, क्योंकि PMLA के तहत सजा सात साल से अधिक नहीं होती है। यदि किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और केवल संपत्ति कुर्क की गई है, तो कुर्की आदेश के साथ अभियोजन शिकायत को 60 दिनों के भीतर निर्णय प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है।

पीएमएलए के तहत ईडी की शक्तियों का विस्तार कैसे हुआ ?:

- 2002 के बाद से, पीएमएलए अनुसूची 6 से 30 अपराधों तक विस्तारित हो गई है।
- ईडी अब आतंकवाद, वन्यजीव शिकार और कॉपीराइट उल्लंघन जैसे कई अपराधों की जांच कर सकती है।
- 2009 में संशोधन में 'आपराधिक साजिश' को जोड़ा गया, जिससे ईडी को साजिश के मामलों की जांच करने का अधिकार मिला।
- 2015 और 2018 में, ईडी को विदेशों में अर्जित धन शोधन से जुड़ी भारतीय संपत्तियों को जब्त करने की शक्ति प्राप्त हुई।
- 2019 के संशोधन ने आपराधिक गतिविधि के माध्यम से अर्जित संपत्तियों को संलग्न करने के लिए ईडी के अधिकार को बढ़ा दिया।
- अप्रैल 2023 में, वित्त मंत्रालय ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) और क्रिप्टो मुद्रा से संबंधित गतिविधियों को जोड़कर पीएमएलए के दायरे का विस्तार किया।
- इस कदम से, वीडीए इकाइयां सीधे ईडी (प्रवर्तन निदेशक) जैसी प्रवर्तन एजेंसियों से निपट सकती हैं।
- जुलाई 2023 में, वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) को पीएमएलए में शामिल किया गया, जिससे धारा 66 प्रावधानों को संशोधित करते हुए जीएसटीएन, ईडी और अन्य एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की अनुमति मिली।

पीएमएलए के तहत ईडी और सीबीआई/एनआईए की शक्तियों की तुलना करने पर कुछ मुख्य विभेद हैं:

1. जुरिसडिक्शन:
   - पीएमएलए ईडी को राज्य सरकारों की सहमति के साथ या उसके बिना, देश भर में अपने व्यापक कार्यक्रम के तहत किसी भी अपराध का संज्ञान लेने की अनुमति देता है।
   - सीबीआई/एनआईए के पास भी देश भर में अपराधों का स्वत: संज्ञान लेने की शक्तियां हैं, लेकिन इसकी जुरिसडिक्शन अधिनियम की अनुसूचियों के तहत सीमित है।

2. आपराधिक संज्ञान:
   - ईडी को विविध आपराधों की जांच करने की अनुमति है, जैसे आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग, और कॉरप्शन।
   - सीबीआई/एनआईए के पास भी अपने कार्यक्रम के तहत कई अपराधों का संज्ञान लेने की शक्ति है, लेकिन यह सीमित अपराधों के अंतर्गत होती है।

3. जांच की शक्ति:
   - ईडी के पास आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों की जांच करने की अनुमति है, जबकि सीबीआई/एनआईए की जांच सीमित अपराधों के अंतर्गत होती है।

4. प्रावधानों का विवाद:
   - पीएमएलए में बयानों की स्वीकार्यता और कड़े जमानत के प्रावधान विवादास्पद हैं।
   - सीबीआई/एनआईए के पास भी अपने कार्यक्रम के तहत विवादास्पद प्रावधान हो सकते हैं, लेकिन यह सीमित अपराधों के लिए होते हैं।

इन पारंपरिक जांच एजेंसियों के बारे में तुलना करने से प्रकार के अपराधों का संज्ञान लेने के तरीके, उनकी जुरिसडिक्शन, और उनके पास की शक्तियों का स्पष्टीकरण होता है।

ED के अधिकार क्षेत्र:

1. फेमा और पीएमएलए का प्रभाव:
   - फेमा और पीएमएलए दोनों भारत में लागू होते हैं, और इसलिए उनके तहत किसी भी व्यक्ति या कानूनी इकाई पर ED कार्रवाई कर सकती है।

2. अदालतों में मामलों का प्रक्रियात्मक स्थिति:
   - फेमा के तहत मामले सिविल अदालतों में चल सकते हैं, जबकि पीएमएलए के मामले आपराधिक अदालतों में पड़ सकते हैं।

3. जांच की प्रक्रिया:
   - ED स्वत: संज्ञान लेकर कोई कार्रवाई नहीं कर सकती, बल्कि पहले किसी अन्य एजेंसी या पुलिस से शिकायत की जानी चाहिए। फिर ED मामले की जांच करेगी और आरोपियों की पहचान करेगी।

4. कार्रवाई का प्रावधान:
   - ED मामले की जांच कर सकती है और आरोपी व्यक्ति की संपत्ति कुर्क कर सकती है और गिरफ्तारी भी कर सकती है। इसके बाद, फेमा और पीएमएलए अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

5. मामले का निर्णय:
   - मामले को अदालतों या पीएमएलए अदालतों द्वारा निर्णय के माध्यम से हल किया जाएगा।

हाल ही में ईडी को आलोचना का सामना करना पड़ा है, और इसके पीछे कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. प्रवर्तन के तहत दुरुपयोग के आरोप:
   - कुछ आरोपों के अनुसार, ईडी ने पीएमएलए के तहत अपराधियों की जांच की विधि में दुरुपयोग किया है। यह सम्मिलित किया गया है कि ईडी ने सामान्य अपराधों की जांच में भी शामिल होकर वास्तविक पीड़ितों की संपत्तियों को छीना है।

2. अधिनियम के व्यापकता का अपनी इच्छा के अनुसार उपयोग:
   - वर्तमान में, अधिनियम की अनुसूचियों में अपराध अत्यधिक व्यापक हैं, और कई मामलों में, नशीले पदार्थों या संगठित अपराध से कोई संबंध नहीं होता है।

3. पारदर्शिता और स्पष्टता की कमी:
   - ईडी द्वारा कार्रवाई के लिए मामलों के चयन में स्पष्टता की कमी हो सकती है, और यह पारदर्शिता के मामलों में संदेह उत्पन्न कर सकती है।

4. सजा दर में कमी:
   - भारतीय संसद के आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2021-22 तक, ईडी के तहत केवल 23 मामलों में ही सजा हुई है। यह आलोचना का एक कारण हो सकता है कि ईडी द्वारा अपराधियों के खिलाफ सजा के प्रावधानों का प्रभावी उपयोग नहीं किया जा रहा हो।

इस आलोचना का परिणाम स्वयं कोर्ट की सुनवाई में दिया जा सकता है, जो पीएमएलए और ईडी के बीच के संबंधों की संवैधानिक वैधता को आलोचना कर रहा है।

ईडी में सुधार लाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम निम्नलिखित हो सकते हैं:

1. संवैधानिक सहमति की अधिकता: पीएमएलए के तहत जांच करने के लिए निर्णायक धिकारी और ईडी के अधिकारियों के बीच संवैधानिक सहमति होनी चाहिए। इससे जांच की प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता और पारदर्शिता आएगी।

2. तेजी से सुलझाई: मामलों को तेजी से सुलझाने के लिए जांच प्रक्रिया को तेजी से और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है। इससे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में विश्वास का निर्माण होगा।

3. शक्तियों का सही उपयोग: ईडी को अपनी विस्तारित शक्तियों का सही और निष्पक्ष उपयोग करने की जरूरत है। इससे न्यायपालिका और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच संबंधों में सहयोग और विश्वास बढ़ेगा।

4. निरंतर जांच: प्रवर्तन निदेशालय को संचालन और वर्तमान स्थिति का निरंतर जांच करनी चाहिए। इससे दोषसिद्धि दर में सुधार हो सकता है और संचालनात्मक भागों में कमियों का संदर्भ दिया जा सकता है।

5. कानूनी सुधार: यदि आवश्यक हो, तो कानून में सुधार किए जा सकते हैं ताकि ईडी के अधिकारों का उपयोग न्यायपालिका के साथ संविदा के अनुसार हो सके।

इन सुधारों के माध्यम से, ईडी को अपराधियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की क्षमता में सुधार किया जा सकता है, जिससे न्यायपालिका और सार्वजनिक स्थान में भरोसा बढ़ेगा।

इसके आलावा, इस विषय में अधिक विवरण और संदर्भ के लिए स्थानीय कानूनी नियमों और विधिक प्रक्रिया के लिए सम्बंधित कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेना उपयुक्त हो सकता है।

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