टैक्सी और सार्वजनिक वाहनों में पैनिक बटन और GPS ट्रैकिंग अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

टैक्सी और सार्वजनिक वाहनों में पैनिक बटन और GPS ट्रैकिंग अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

देश में सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा आदेश जारी करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टैक्सी और अन्य सार्वजनिक सेवा वाहनों में Vehicle Location Tracking Device (VLTD) और पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए।

Justice JB Pardiwala और Justice KV Viswanathan की पीठ ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि देश में एक प्रतिशत से भी कम परिवहन वाहनों में लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगे हुए हैं। अदालत ने कहा कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों की सुरक्षा के लिए ये सुविधाएँ बेहद जरूरी हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब किसी भी सार्वजनिक सेवा वाहन को फिटनेस सर्टिफिकेट या ट्रांसपोर्ट परमिट तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक उसमें Vehicle Location Tracking Device और इमरजेंसी/पैनिक बटन न लगे हों।

अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया कि इन सुरक्षा उपकरणों की जानकारी VAHAN डेटाबेस से जोड़ी जाए, ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके।

कोर्ट ने 21 दिसंबर 2018 से पहले रजिस्टर्ड सभी सार्वजनिक वाहनों में भी VLTD और पैनिक बटन लगाने के लिए रेट्रोफिटिंग सुनिश्चित करने को कहा।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह सुझाव भी स्वीकार किया कि वाहन निर्माता कंपनियाँ ही वाहन बेचने से पहले इनमें ये सुरक्षा उपकरण लगाकर दें। इस संबंध में अदालत ने केंद्र सरकार को वाहन निर्माताओं से चर्चा कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा कोर्ट ने राज्यों को स्पीड गवर्नर (Speed Limiting Devices) नियमों के पालन में लापरवाही पर भी फटकार लगाई और कहा कि सभी वाहन निर्माताओं के लिए स्पीड लिमिटिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य है।

अदालत ने National Road Safety Board के गठन में देरी पर नाराज़गी जताते हुए केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर बोर्ड गठित करने का अंतिम अवसर दिया।

यह मामला 2012 में दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और सड़क सुरक्षा उपायों को लेकर चिंता जताई गई थी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता Gaurav Agarwal अमीकस क्यूरी के रूप में उपस्थित हुए, जबकि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल Vikramjeet Banerjee ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा।

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